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बिहार के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में एक “बिहार नेशनल कॉलेज”

पटना, बिहार में स्थित बिहार नेशनल कॉलेज (Bihar National College) एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है जो राज्य के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध कॉलेजों में से एक है. दुनिया की सबसे पवित्र नदी गंगा के तट पर एक खूबसूरत परिसर में स्थित, बी.एन. कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियाँ लड़कों और लड़कियों दोनों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में बहुत बड़ी हैं. यह संस्थान दशकों से छात्रों को उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर रहा है. आइए जानते हैं, इस कॉलेज के बारे में विस्तृत जानकारी –

स्थापना

बिहार नेशनल कॉलेज, जिसे बी.एन. कॉलेज (B.N.College) के नाम से जाना जाता है, की स्थापना 5 फरवरी 1889 में कुल्हारिया राज, भोजपुर, बिहार के दो उत्साही शिक्षाविदों और राष्ट्रवादियों बाबू बिशेश्वर सिंह और शालिग्राम सिंह द्वारा की गई थी.

1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन के बाद ब्रिटिश शासन के दौरान, इन दोनों भाइयों को छात्रों के बीच राष्ट्रवादी भावनाओं को भड़काने की सख्त जरूरत महसूस हुई, इस कारण इस कॉलेज का नाम बिहार नेशनल कॉलेज रख दिया गया. लेकिन तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने “नेशनल” शब्द को हटाने के लिए उन पर बहुत दबाव डाला और राजा की पदवी और बहुत बड़ी जागीर देने का वादा किया. लेकिन ये दोनों भाई अन्य जमींदारों से अलग थे. उस वक्त के अधिकांश जमींदार शिक्षा के प्रसार को अपने अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा मानते थे. वहीं ये सिंह भाई शिक्षा के महान और ऊंचे उद्देश्यों के लिए प्रतिबद्ध थे और इसी कारण उन्होंने ब्रिटिश दवाबों के आगे घुटने नहीं टेके.

उस समय बिशेश्वर सिंह कलकत्ता कॉलेज ऑफ लॉ में अंतिम वर्ष (कानून) के छात्र थे. कलकत्ता के गवर्नर जनरल ने उन्हें कॉलेज से निकाल दिया. इतना ही नहीं जब बिशेश्वर सिंह ने पीएल सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद पटना सिविल कोर्ट में वकालत शुरू की, तो उन्हें बार एसोसिएशन में बैठने की भी अनुमति नहीं दी गई. उसे अनगिनत राहों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. ब्रिटिश सरकार ने उन्हें विद्रोही घोषित कर दिया और अंततः शालिग्राम सिंह के पुत्र और जस्टिस के.बी.एन. सिंह के पिता शशि शेखर सिंह की 1942 में गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसलिए, यह “नेशनल” शब्द एक लंबे और गौरवशाली इतिहास के साथ बहुत सार्थक है, जो आज भी छात्रों को राष्ट्रवादी भावनाओं और भावनाओं से अवगत कराता है. बिहार विधान सभा के सामने हुए सात शहीदों में शामिल जगपति कुमार इसी कॉलेज के छात्र थे.

संलग्नता

1892 में कलकत्ता विश्वविद्यालय ने इसे प्रथम स्तर के कॉलेज का दर्जा दिया. 1923 में पटना के तत्कालीन कमिश्नर एकडेल अर्लेओ (Accdale Earleo) के प्रयास से इस कॉलेज को सरकार के नियंत्रण में लिया हुआ और इसे पूर्ण घाटा अनुदान महाविद्यालय का दर्जा दिया गया. 1952 में इस कॉलेज को पटना विश्वविद्यालय की एक घटक इकाई में परिवर्तित कर दिया गया. आज यह कॉलेज पटना विश्वविद्यालय, पटना से संलग्न है.

पाठ्यक्रम

शुरुआत में, बी एन कॉलेज में ऑनर्स स्तर तक अंग्रेजी, संस्कृत, फ़ारसी, हिंदी, दर्शनशास्त्र आदि की पढ़ाई जाती थी. बिहार में पहली बार इसी कॉलेज में कानून की पढ़ाई की शुरुआत हुई. प्रो. आत्माराम, जो बाद में पटना कॉलेज के प्राचार्य बने, विधि संकाय के प्रथम प्रभारी थे. आजकल यह कॉलेज तीन संकायों में ऑनर्स की पढ़ाई कराता है – मानविकी संकाय, विज्ञान संकाय और सामाजिक विज्ञान संकाय. स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षा अंग्रेजी में दी जा रही है. चार व्यावसायिक पाठ्यक्रम: फंक्शनल इंग्लिश, बायोटेक्नोलॉजी, बीसीए और बीबीए सफलतापूर्वक और कुशलता से चलाए जा रहे हैं. कई विद्यार्थियों ने वैश्विक स्तर पर अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है.

आज यह कॉलेज यूजीसी अधिनियम 1952 की धारा 12 बी के तहत स्थायी रूप से संबद्ध है. इसे 2003 में यूजीसी एनएएसी पीयर टीम द्वारा बी ++ ग्रेड के साथ मान्यता दी गई है. यह यूजीसी द्वारा पत्र संख्या के तहत उत्कृष्टता (सीपीई) की क्षमता वाला एक कॉलेज है (एफ. 12-1/2010 (एनएस/पीई) दिनांक 07 दिसंबर, 2011).

संस्थान के शिक्षक

कॉलेज में विशेषज्ञ और अनुभवी शिक्षक हैं, जो छात्रों को उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करते हैं. कैंपस विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल-कूद सुविधाएं और कंप्यूटर प्रयोगशालाएं समेत आधुनिक सुविधाएं प्रदान करता है. इस कॉलेज के प्रकांड शिक्षकों की सूची में प्रो. केसरी कुमार, प्रो. सूरज प्रसाद सिंह, मेजर प्रो. तेज नारायण सिंह, प्रो. सीताराम शर्मा, पद्मनारायण सिंह, डॉ. शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव, डॉ. केदारनाथ सिंह कलाधर, प्रो. दिनेश प्रसाद सिंह, प्रो. बलराम तिवारी, सुकवि प्रो. सुरेन्द्र स्निग्ध, प्रो. बिलट पासवान शास्त्री, डॉ. दिलीप राम आदि के नाम प्रमुख हैं. डॉ. शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव पटना संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं.

अतिरिक्त कला गतिविधियाँ

कॉलेज खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमिनार, कार्यशाला और सामाजिक सेवा पहलों जैसी अतिरिक्तकला गतिविधियों को सक्रियता से प्रमोट करता है. ये गतिविधियाँ छात्रों को एक पूर्णतात्मक शिक्षा अनुभव प्रदान करती हैं.

यह कॉलेज शिक्षकों और छात्रों को हर क्षेत्र में तरोताजा और आधुनिक बनाए रखने के साथ अपनापन और एकजुटता के लिए स्पिक मैके और अन्य के सहयोग से वार्षिक खेल, वाद-विवाद, अतिथि व्याख्यान, सेमिनार, होली मिलन, ईद मिलन और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करता है.

शैक्षिक उपलब्धियाँ

बिहार नेशनल कॉलेज ने वर्षों के दौरान शिक्षणीय उत्कृष्टता के लिए एक प्रतिष्ठा जीती है और विभिन्न क्षेत्रों में अनेक विद्वानों और प्रतिभागियों को निर्माण किया है. यह बिहार के लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है और राज्य के शिक्षा और सांस्कृतिक विश्वस्तर में महत्वपूर्ण योगदान करता है.

(निखिल के डी वर्मा)

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